धंधा मूड से नहीं, मक़सद से चलता है !
धंधा मूड से नहीं,
मक़सद से चलता है!
दुनिया का सबसे बड़ा झूठ है-"वही काम करो
जिसमें मन लगे।" हकीकत यह है कि धंधे में 80%
काम उबाऊ (Boring) होते है असली खिलाड़ी
वह नहीं जो जोश में शुरुआत करे बल्कि वह है
जो 'मन' न होने पर भी उसी परफेक्शन के साथ
गद्दी पर डटा रहे।
लॉजिक सीधा है: मोटिवेशन
एक कच्चा नशा है जो उतर जाता है, लेकिन
Discipline वह लोहे की ज़ंजीर है जो साम्राज्य
को ढहने नहीं देती। कड़वा सच यह है कि जो
अपने 'मूड फा गुलाम है, वह बाज़ार का राजा
कभी नहीं बन सकता। अपनी भावनाओं को
दुकान के बाहर टांग दो, क्योंकि गल्ला सिर्फ
पसीने और नियम की भाषा समझता है।
The lron will: अपनी भावनाओं को दुकान के
बाहर टांग दो, गल्ला सिर्फ नियम समझता है।
मूड के गुलाम या सपनों के मालिक ? कमेंट
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